भाई दूज 2022 तारीख, शुभ मुहूर्त, महत्व, कहानी

भाई दूज – आज के इस पोस्ट में हम भाई दूज के बारे में विस्तार से जानेंगे. इस पोस्ट में हम हम जानेंगे की भाई दूज कब है? भाई दूज कब मनाई जायेगी? भाई दूज 2022 तारीख और शुभ मुहूर्त, साथ ही भाई दूज क्यों मनाई जाती है? भाई दूज की कहानी, भाई दूज का महत्व, तथा भाई दूज कैसे मनाएं?

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Bhai Dooj | भाई दूज

Bhai Dooj Kab hai? Bhaiya Dooj Kab Hai?

हमारा देश तो त्योहारों का देश है. हमारे यहाँ कई तरह के त्यौहार मनाये जातें हैं.

भाई दूज भी हम सबका एक महत्वपूर्ण त्यौहार है. यह त्यौहार दिवाली के दो दिनों के बाद मनाया जाता है.

कहीं कहीं लोग होली त्यौहार के दुसरे दिन भाई दूज का त्यौहार मनाते हैं.

भाई दूज के त्यौहार को भैया दूज, यम द्वितीया, भ्र्द्वितिया, भाऊ बीज, भ्रातृ द्वितीया, भाई टीका, और भाई फोटा आदि नामों से भी जाना जाता है.

यह त्यौहार रक्षा बंधन के समान ही भाई बहन का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है.

भाई और बहन के आपसी प्रेम, लगाव और एक दुसरे के प्रति स्नेह आदि की तुलना नहीं की जा सकती है. यह त्यौहार इस रिश्ते को और मजबूती प्रदान करता है.

भाई दूज के त्यौहार में बहने अपने भाई की लम्बी आयु, कुशलता और समृद्धि की कामना करती है.

अब हम भाई दूज का त्यौहार कब मनाया जाता है? के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे.

भाई दूज कब है? (Bhai Dooj | Yam Dwitiya Kab Hai?

भाई दूज का त्यौहार प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है.

यह दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है.

अगर हम होली के बाद वाले भाई दूज की बात करें तो यह चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है.

भाई दूज 2022 में कब है? भाई दूज 2022 तारीख

भाई दूज का त्यौहार साल 2022 में 26 अक्टूबर 2022, दिन बुधवार को है.

त्यौहारतारीख और दिन
भाई दूज 202226 – 10 – 2022 ( 26 अक्टूबर 2022 ) दिन – बुधवार

भाई दूज 2022 शुभ मुहूर्त

भाई दूज के दिन मुख्य रूप से बहने अपने भाई के माथे पर तिलक लगातीं हैं और अपने भाई का नौत लेती हैं. इसके लिए शुभ मुहूर्त निचे टेबल में दिया हुआ है.

त्यौहारशुभ मुहूर्त समय
भाई दूज 202226 अक्टूबर 2022, बुधवार
1:12 पी एम से 3:27 पी एम तक

अब हम साल 2022 में होली के बाद वाले भाई दूज के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेतें हैं.

2022 होली के बाद भाई दूज कब है?

होली के बाद आने वाले चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीय तिथि को भाई दूज कुछ जगहों पर मनाई जाती है.

साल 2021 में यह 30 मार्च 2021 को संपन्न हो चुकी है.

साल 2022 में होली भाई दूज 20 मार्च 2022, दिन रविवार को है.

त्यौहारतारीख और दिन
होली भाई दूज20 मार्च 2022, दिन – रविवार

भाई दूज का महत्व ( Bhai Dooj Ka Mahatw )

भाई दूज भाई बहन के प्रेम का त्यौहार है.

इस त्यौहार से भाई बहन के आपसी रिश्ते को मजबूती मिलती है.

इस त्यौहार में भाई अपने बहन के यहाँ जाता है. बहन अपने भाई का स्वागत करती है. उसे तिलक लगाती है. उसकी लम्बी आयु और मंगल जीवन के लिए प्रार्थना करती है.

इस दिन बहने अपने भाई को तरह तरह के व्यंजन बना कर भोजन करवाती है.

इस दिन यमुना नदी में स्नान करने का भी बहुत महत्व है.

इस दिन भाई का अपने बहन के यहाँ भोजन करना बहुत ही शुभ होता है.

भाई दूज कैसे मनाएं? भाई दूज पूजा विधि

भाई दूज मनाने के कई रिवाज हैं. हमारे देश में भाई दूज कई तरह से मनाया जाता है.

एक रिवाज के हिसाब से इस दिन भाई अपने बहन के यहाँ जाता है. बहने एक सुखा नारियल को क्लेवा से बांधती है. भाई के माथे पर तिलक लगाती है और आरती उतारती है. और फिर यह नारियल अपने भाई को दे देती है.

भाई अपनी बहन को कुछ उपहार और नकद आदि देता है.

दुसरे रिवाज के अनुसार इस दिन भाई अपने बहन के यहाँ जाता है. बहन उसका स्वागत करती है.

बहन इस दिन प्रातः काल में स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती है.

एक आसन पर बहन अहिपन लगाती है. इस आसन पर भाई को बैठाया जाता है.

फिर बहन अपने भाई की नौत लेती है. इसमें कुम्हर का फूल, पान पत्ता और एक चाँदी का सिक्का लिया जाता है. इस एक मट्टी के बर्तन में रखा जाता है.

बहन सबसे पहले अपने भाई के माथे पर चन्दन और सिंदूर का टिका लगाती है. फिर अपने भाई के हाथ में अहिपन और सिंदूर लगाती है. और उपर बताई गयी सामग्री को अपने भाई के हाथ में रखती है.

फिर लोटे में रखे गए पवित्र जल को अपने भाई के हाथ पर डालते हुए सभी सामग्री को वापस उस मिटटी के बर्तन में गिराती है.

इस प्रक्रिया में बहन कहती है – यमुना नौते यम के, हम नौत रहें हैं अपने भाई को, जितना यमुना में जल बढ़े, उतना मेरे भाई का आयु बढ़े.

उसके बाद बहन अपने भाई को मिठाई खिलाती है और भाई कुछ उपहार अपनी बहन को देता है.

और एक रिवाज के अनुसार इस दिन बहने प्रातः काल में उठकर स्नान आदि करने के पश्चात स्वच्छ और पवित्र वस्त्र धारण करती है.

इसके पश्चात अहिपन के माध्यम से सात बहनों और एक भाई की आकृति बनाती है. साथ ही एक और सांप, बिच्छु आदि विपत्ति का प्रतिक बनाती है. फिर पूजा कथा करने के पश्चात मुसल से इन सांप बिच्छू आदि विपत्ति के प्रतिक को तोड़कर भगवान् से अपने भाई की कुशलता और लम्बी आयु की प्रार्थना करती है.

फिर अपने भाई की आरती उतारती है और तिलक लगाती है.

भाई दूज क्यों मनाई जाती है?

मान्यताओं के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने यहाँ आने का निमंत्रण दिया था.

यमराज के आने पर यमुना ने उनका आदर सत्कार करने के पश्चात उन्हें तिलक लगाया था और उनकी आरती उतारी थी.

फिर यमुना ने यमराज को तरह तरह के व्यंजन खिलाये.

उस दिन यमुना ने अपने भाई यम से प्रत्येक वर्ष इसी तिथि को आने का वचन लिया. उसी दिन से भाई दूज की शुरुआत हुई और प्रत्येक वर्ष कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाई जाने लगी.

इस दिन मनुष्य को पाने बहन के यहाँ ही जाकर भोजन करना चाहिए और अपनी बहन को यथा शक्ति उपहार देना चाहिए. बहने भी इस दिन अपने भाई को उपहार आदि दे सकती हैं.

भाई दूज की कहानी

भाई दूज की कहानी से संबंद्धित कुछ यूट्यूब विडियो हमने निचे दिए है. आप इन कथाओं को देख सकतें हैं.

भाई दूज की कहानी

आप सबको भाई दूज की हार्दिक शुभकामनाएं.

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